अनिंद्रा
आज से ठीक एक हफ़्ते बाद बिलट को फाँसी दे दी जाएगी । "क्यों किया था उसने ऐसा? उसे अपने माँ-बाप के बारे में सोचना चाहिए था। " मेरा मन बहुत दुखी था। बिलट के बारे में सोचते हुए मैं स्कूल जा रहा था । अचानक मेरे सामने आकर एक मोटरसाइकिल रुकी । मैनें भी अपनी साइकिल रोकने की पूरी कोशिश की। साइकिल की दोनों ब्रेक को ज़ोर से दबाया। साइकिल का संतुलन जाता रहा और मैं ज़मीन पर काफ़ी वेग से गिरा। " खुद तो मरेगा और मुझे फँसाएगा। साइकिल नही चला सकते तो रोड से दूर रहो।” बाइक सवार भुनभुनाया। मैं अपना दर्द उसको कैसे बताता? बिलट के अवश्यंभावी मृत्यु ने मुझे झकझोड़ कर रख दिया था। मैनें तुरंत माफी माँगना मुनासिब समझा। बाइक सवार भी मेरे आचरण से पिघल गया। " बेटा साइकिल होश में चलाया करो। " बाइक सवार ने मुझे नसीहत दी। नसीहत देने के बाद मोटरसाइकिल सवार चलता बना। मैनें जमीन पर गिरी हुई साइकिल उठाई। ज़ोर से गिरने के कारण मेरी नई साइकिल में बहुत सारे दाग आ गये थे। मेरी साइकिल आज दस दिन पुरानी हुई थी। इस घटना से मेरा ध्यान बिलट से हट कर साइकिल पर आ गया। मैनें ध्यान से देखा तो पाया ...