गमले का पौधा

तुम एक छोटे से गमले में थे,
क़ैद करके मैने तुमको रखा था।
हाँ पानी से सिंचता  था  तुम्हें,
हाँ कड़ी धूप से बचाता था  तुम्हें।
खुशी होती थी तुम्हें बढ़ता हुआ देख कर,
मज़ा आता था तुम्हारे कोमल तन को छुकर

जब घर टूटा मेरा,
बारिश का मौसम था।
दिन में धूप की गर्मी,
रात में बेहिसाब पानी।
घर वालों को आराम,
बेघरों की परेशानी।

गमाल अब टूट चुका था।
चारों ओर अब मिट्टी ही मिट्टी थी।
गर्मी मुझे तबाह कर रही थी,तुम्हें आबाद कर रही थी।
बारिश तुम्हारे तने को मजबूत कर रहा था,मेरे तन को कमजोर कर रहा था।
अब तुम पैधे से पेड़ बन रहे थे, मैं आदमी से बीमार  बन रहा था।

अब तुम विशाल वृक्ष बन गये हो,
मेरे लिए नया घर बन गये,
जब मैं तुम्हारी छाँव मेंबैठता हूँ
तुम मेरी गोद में फल गिरा देते हो ।
मीठा फल जो तुम झुरमुटों में छिपा के रखते हो,
फल जो तुम्हारे आगोश में पकते हैं,
उनमें स्वाद होता है,उनमें सुगंध होता है।

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