कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
लोकल के चौथी सीट के लिए लड़ने वालों की भीड़,
पेट काट कर स्कूल पढ़ाने वालों की भीड़,
अड्मिशन के लिए लंबे लाइन में लगने वालों की भीड़
सरकार को गालियाँ देनेवालों की भीड़,
सरकार की तारीफ करनेवालों की भीड़।
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
ऑडिटोरियम में सत्संग सुनने वालों की भीड़,
नेताओं की इफ्तार पार्टी में शिरकत करनेवालों की भीड़,
जान जोखिम में डाल के रैली जाने वालों की भीड़,
'अपने लोगों' को वोट डालने वालों की भीड़
दिमाग़ से नही दिल से सोंचने वालों की भीड़।
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
सेकुलर और कम्यूनल लोगों की भीड़
शोशाल मीडिया में संभ्रांत बनने वाली भीड़,
शोशाल मीडिया में जली कटी सुनाने वाली भीड़,
आई सी यू में भर्ती दोस्त को भूल जाने वाली भीड़,
बर्थडे के दिन दोस्त को याद करने वाली भीड़।
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
अभियान में साफ-सफाई, वैसे गंदगी फैलने वाली भीड़
ग़रीबी का रोना और ग़रीबों के लिए कुछ ना करने वाली भीड़
जूते वालों को सभ्य और नंगे पाँव असभ्य कहने वाली भीड़
लूट मार को कमाई कहने वाली भीड़
फर्जी सार्टीफिकेट बनाने वाली भीड़।
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
सीरिया- अयोध्या को अपना ,
बंगलादेश-बिहार को बेगाना कहने वालों को भीड़
उन्माद को उद्गार कहनेवालों को भीड़
जान से मरने की धमकी देनेवालों की भीड़
बेवजह बम फोड़ने वालों की भीड़
रोजदार को मारकर 'जिहाद' करने वालों की भीड़।
कभी पूछा तुमने,तुम ये क्यों करते हो?
क्यों बेकार बातों को तरजीह देते हो,
क्यों अपने जमीर को सोने देते हो?
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